सेल्फ लव
आज बगल वाली टेबल पर एक मध्यम उम्र के व्यक्ति बैठे थे।आसपास हर टेबल पर कोई - न- कोई अपने परिवार के साथ आया था लेकिन वो बिल्कुल अकेले थे। अकेले होने के बावजूद अकसर हम लोगों से दूर अलग- थलग किसी कोने में बैठने के बजाय वो परिवार और बच्चों से घिरे टेबल पर बैठे थे। शायद हमसे पहले आए थे इसलिए जब हम पहुंचे तब तुरंत ही उनका ऑर्डर आ गया। ऑर्डर में पारंपरिक थाली थी । वैसे साइकाॅलजी कहती हैं कि जो व्यक्ति अकेले सिनेमा देखने या रेस्तरां में खाना खाने जा सकता है वह मानसिक रूप से बहुत मजबूत होता है। आज पहली बार किसी ऐसे व्यक्ति को देखा। आसपास मौजूद लोग उन्हें संदेह या सहानुभूति भरी दृष्टि से देख रहे थे। कुछ फुसफुसाहट भी सुनाई दे रही थी।सोशल मीडिया पर हम हर दूसरे दिन किसी - न-किसी को सेल्फ केयर और सेल्फ लव का महत्व समझाते हुए पाते हैं लेकिन असल जिंदगी में सेल्फ लव को लोग बड़े जजमेंटल होकर देखते है। "अरे बड़ा स्वार्थी है" , "नहीं - नहीं लगता है परिवार में कोई नहीं इसका"," मेरी मानो घरवाली से झगड़ कर आया होगा" आदि। हमारा समाज सेल्फ लव को आधुनिकता के चोंचले मानता है। और ...